हिमालय ‘त्रासदी’ है एक संकेत शायद.. प्रकृति भी चूक कर बैठती है -We are all united in our prayers !

हिमालय ‘त्रासदी’ है एक  संकेत शायद,
कि मानवता के संरक्षण-आंकलन में ,
कई बार प्रकृति भी चूक कर बैठती है।
जीवन के परिसर में , जब
ज़िन्दगी ,मानवीय जीवन जीती है;
बिन परवाह कुदरत करवट बदलती है ,
और इस हलचल का सीधा दायित्व नहीं लेती है ।
क्योंकि जब ‘यह’ खुद को हमें पूर्ण सौंपती है –
हमारे हाथों में ,
तो हिसाब भी नहीं लेती है +
जुगाड़ भी नहीं लेती है।
हम धरा के लोग ,
जो चाहे करते हैं।
अपने जीवन के महत्व के आगे ,
कुदरत के विशाल साम्राज्य में ,
रेत -बंजर महल खड़े करते हैं।
और दिन-रात खड़े करते हैं।।
शायद , मसले और ‘यह-वो ‘ विषाद खड़े करते हैं।
सोचते हैं कि  सब सही है ,
यही और यहीं है,
अपने तुच्छ जीवन में ,
आँख बंद कर लेते हैं ,
सीमित घरौंदों के अंदर ‘ ज़िन्दगी’ को बंद कर लेते हैं,
किवाड़ खिंच लेते हैं।
फिर वही होता है ,
जो ‘ होना ‘ होता है
और
त्राहि-त्राहि मानवता करती है,
जब नि:शब्द प्रकृति अपनी सम्पति
चाहें , मानव हों या धरा-पाताल
पर अपना  ‘विचित्र’ नृत्य करती है-
अधिकार और वर्चस्व का दावा करती है।
कुछ ,
तो होगा कहीं ,
जिस पर ‘ कुदरत ‘ बिफरती है?
हो-हल्ला मचता है , कुछेक दिन ,
फिर ज़िन्दगी , पहिले सी चलती है।
यादाशत भी हमारी सीमित चलती है।
मानवीयता के कुछ पाठ सीखे जाते है ,
इन त्रासदी के क्षणों में ,
रोती आँखों को दिलासा ,
भूखे लोगों को आशा ,
बीमारो को मरहम पट्टी ,
बेघर हुयों को छाँव।
कुछ लोग मलबे के नीचे हो सकते है,
ज़िंदा बच सकते हैं ,
कुदरत के करिश्मे भी हो सकते हैं।
हाशियों के साथ ही एकदम नहीं
लग जाते है ‘ विराम।’
हम कई परिस्थितियों में  जब ज़्यादा न कर सकें
‘ प्रार्थना ‘ कर प्रकृति को आत्म -विभोर कर सकते हैं।
हम शायद ; हाँ , इतना तो कर सकते हैं ,
हम किसी खामोश सी ताकत में आस्था तो रख सकतें है।
बुझते हुए दीयों में ‘ बाती ‘ रख सकते हैं।
देख  कर ‘ त्रासदी ‘ और ‘ विषाद’ भी ,
हम ‘ कर्म ‘ पथ के पथिक ,
‘ शांति’ रख सकते हैं क्योंकि
मानवता-मूल्यों में ताकत है ,
हम फिर से जुट जाएंगे।
जो बच गयें है ,
हम उन्हें बचा सकते हैं।
एक कोशिश कर रहे हैं ,
कोशिश कर सकते हैं।
प्रकृति भी आखिरकार मातृत्व का आँचल हैं ,
आंसू हैं , ‘ हां’ दुःख है।
विश्वास भी है , क़ि यह आंसू बच्चों के हैं ,
 जो माँ से ही ‘ पोंछें ‘  जायेंगे।
May the nature calms down! May we all include the ‘ lives ‘ hurt in our prayers !! May we never forget that there are ‘forces’ we shall have no say in forever !!!
27_04_2015_008_023_007
                                        Picture Courtesy : Times of India , E-edition
India, as a neighboring country has reached ‘Nepal victims’ in record-time, and we are very sure that every Indian’s or for that from every corner of the globe ‘ Prayers ‘ are united to echo in the vast regime of Himalayan kingdom. 
http://www.c-infiniti.in
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