पॉपी के फूलों ने तुम्हें निहारा , भरसक जी भर के , दिल को खोल के। धरती ने चेहरा संवारा आँचल के छोर से

WW1-Poppy Wreath The Hearts that Bled

पॉपी खिलते गये, भरमार 

सर उठायेशाखाओं के परिसर आसमानों के झरोखें में 

खुद को झोंककर तकते हुये। 

खिल रहे थे यह जानते हुये भी क़ि , 

 देखने वाले भीअब रहे हैं नहीं।

खाली सीआँखें , काली सी दुखती सी आँखे 

और हृदय की ललित , संवेदनाओंके  भीतर  उतरती सी आँखें

शीर्ष गर्व से खड़े थे , आत्मा के वातायन  खुले थे

पॉपी खुद भी स्तब्ध थे कि

यह रक्त किसका है, उनका पोषण का कर्मानुसार क्रमांश संभाले

उनकी नवचेतना को भरसक जगाये , सूर्य पर भी आने का पहरा लगाये ?

 

सोचकरविचारक का माथा ठनठनाये , 

कि माटी से भी लहू , पसीने और जज़्बात की खुशबू सी आये।  

फ़्लैंडर्स में पॉपी की उपज बढ़ती सी जाये , 

और जवानों की रक्तिम शहादत , दिन रात 

क्या रंग लाये ? धरती आँचल संभाले

आकाश को देखे आंसू बहाये।  

  मासूम और नादान थेवो भारतीय जवान

जो जा पहुंचे , अनजान गंतव्य , दूरदराज। 

और चुप से, खामोश से पीछे रह गये , कुदरत के साथ। 

सर को ऊँचा ही रखा

और उसमे गर्व ही रखा

तुम गये वहां जीजान लुटाने

और फिर गये दिन 

शहीदकहाने।  

धरा नेचुपचाप आंसू बहाये , 

और बैठी ले कर तुम्हें आँचल में समाये , 

पॉपी से ढके तुम्हारे चेहरे कोएकटक निहारे ,

मेरे लाल , मैं तुम पर जाऊं वारे न्यारे! ” 

http://www.c-infiniti.in

Advertisements
This entry was posted in Uncategorized. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s